वन्य जीव प्रेमियों के लिए फिर एक बुरी खबर लोकप्रिय बाघिन की मौत

राज्य
मृत बाघिन

उमरिया – जिले के विश्वविख्यात बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में हुई मादा बाघिन की संदिग्ध मौत, गेट नंबर एक ताला जोन के वनबेई के समीप घोड़ा डेमन नामक स्थान के आर एफ 325 में मिला बाघिन का शव, जांच में जुटा प्रबंधन।

विश्वविख्यात बाँधवगढ टाइगर रिजर्व में रविवार की देर रात बाघिन का शव मिला है, टाइगर रिजर्व के गश्ती दल को गेट नंबर एक ताला जोन के वनबेई के पास घोड़ा डेमन नामक स्थान पर बाघिन का शव मिला है मृत बाघिन की उम्र म 10 से 11 साल के बीच की बताई गई है, घटना की जानकारी के बाद पार्क के उच्च अधिकारी मौके पर पंहुच गए, हालांकि ज्यादा रात और अंधेरा होने के कारण जांच एवं अग्रिम कार्यवाई सुबह से आरंभ की गई है। सी एफ राजीव कुमार मिश्रा ने बताया है कि वन्य जीव चिकित्सक एनटीसीए सदस्य और मेरी मौजूदगी में मृत बाघिन का पीएम कराया गया है। घटना स्थल की फोरेंसिक जांच के बाद ही बाघिन की मौत के कारणों का पता चल पाएगा।

कार्रवाई करते अधिकारी


प्रेस नोट जारी कर पार्क प्रबंधन ने बताया कि बाघिन टी41 विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की शान स्पॉटी नाम से जानी जाती थी। पर्यटक इसके दीदार करके खुश हो जाते थे। वहीं बाघिन की मौत का कारण भूख से संक्रमण होना बताया गया है, अब सवाल यह उठता है कि 10 से 11 वर्ष की उम्र की बाघिन की मौत भूख से कैसे हो गई, यदि वन्य जीव विशेषज्ञों की मानी जाय तो बाघ की उम्र 16 वर्ष होती है और 13 वर्ष के बाद उनमें शिथिलता आनी शुरू होती है लेकिन यहां तो 10 वर्ष की बाघिन को ही शिथिल बता कर अपना पल्ला झाड़ लिया गया। कहीं ऐसा तो नही कि जहर खुरानी का शिकार हो गई हो और प्रबंधन अपनी अकुशलता छिपाने के लिए उम्र दराज बताने लगा, खैर जो भी हो पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही कारणों का खुलासा हो सकेगा और पोस्टमार्टम रिपोर्ट छिपा कर ही रखी जायेगी।
गौरतलब है कि एक तरफ देश के प्रधानमंत्री नामीबिया से चीता मंगवा कर देश मे चीतों को संरक्षण दे रहे हैं, वहीं अभी तक मध्यप्रदेश को टाइगर स्टेट का दर्जा प्राप्त था तो दूसरी तरफ चीता स्टेट का दर्जा प्राप्त करने की भी तैयारी चल रही है। दूसरी तरफ बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में लगातार हो रही बाघों की मौत ने वन्य जीव प्रेमियों के मन मस्तिष्क में खलबली मचा दी है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि बाघिन की मौत से बाघ प्रजाति को बड़ा नुकसान होता है, वहीं बाघों के कुनबे की वृद्धि रुक जाती है। दूसरी तरफ यदि देखा जाय तो पार्क प्रबंधन की लापरवाही साफ नजर आती है, कि मात्र कागजों में पेट्रोलिंग होती है, और ऐसे मामले सामने आने पर प्रबंधन के पास सीधा जबाब आपसी संघर्ष का होता है, लेकिन इस बार तो बाघिन को उम्र दराज बता दिया गया। अब देखना होगा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट क्या आती है।

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